राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय

राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय– राजस्थान अपनी संस्कृति, राजाऔ की वीरता, गढ़ व किलो के लिए जाना जाता है | राजस्थान के संत तथा भक्तिमय गांथाए विश्व भर में प्रचलित है | विश्व की सबसे ज्यादा जातीय व धार्मिक संप्रदाय राजस्थान में ही है | राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय

राजस्थान में कौन-कौन से समुदाय/सम्प्रदाय हैं?

1. दादू सम्प्रदाय
2. चरणदासी सम्प्रदाय
3. जसनाथी सम्प्रदाय
4. लाल दासी सम्प्रदाय
5. विश्नोई सम्प्रदाय
6. प्राणनाथी सम्प्रदाय
7. वैष्णव धर्म सम्प्रदाय
8. शैवमत सम्प्रदाय
9. नाथ सम्प्रदाय
10. राजा राम सम्प्रदाय
11. तेरापंथी संप्रदाय
12. निरजंनी सम्प्रदाय
13. निष्कंलक सम्प्रदाय
14. अलखिया सम्प्रदाय

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जसनाथी सम्प्रदाय

  • जसनाथी संप्रदाय का संस्थापक जसनाथ जी जाट है |
  • जसनाथ जी का जन्म ‘कतरियासर’ बीकानेर में सन 1482 में हुआ था |
  • जसनाथी संप्रदाय कि प्रधान पीठ कतरियासर बीकानेर में स्थित है |
  • जसनाथी संप्रदाय 36 नियमों का पालन कथा है |
  • जसनाथी संप्रदाय के लोग अग्नि नृत्य करते हैं |
  • जसनाथ जी को ‘गोरखमालिया’ बीकानेर में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी |
  • जसनाथी संप्रदाय का पवित्र ग्रंथ सिमूदड़ा और कोडा ग्रंथ है|
  • जसनाथी संप्रदाय का प्रचार परमहंस मंडली द्वारा किया गया था |
  • जसनाथी संप्रदाय की 5 उप-पीठे – बमलू, लिखमादेसर, मालासर, पूनरासर (बीकानेर ) व पांचला नागौर में है |

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विश्नोई सम्प्रदाय

  • बिश्नोई समुदाय के संस्थापक जांभोजी थे |
  • जांभोजी का जन्म 1451 ईस्वी में “पिपासर” नागौर में हुआ था |
  • जांभोजी पंवार राजपूत के घर में जन्मे थे, जिन्होंने आगे चलकर एक अलग धर्म बिश्नोई धर्म की स्थापना की थी |
  • विश्नोई संप्रदाय के प्रमुख ग्रंथ “जंभ सागर, जंभ वाणी, बिश्नोई धर्म प्रकाश” है|
  • जांभोजी ने धर्म का पालन करने हेतु 29 नियम दिए |
  • जांभोजी को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है |
  • विश्नोई संप्रदाय के लोग वन्य व वन्य जीवों की विशेष देखभाल करते हैं |
  • बीकानेर की नोखा तहसील के मुकाम स्थान पर जांभोजी की समाधि स्थल है, यह विश्नोई संप्रदाय का एक प्रमुख स्थल है |
  • जोधपुर के रामड़ावास में जांभोजी ने अपने शिष्यों को उपदेश दिए थे |
  • जैसलमेर के महाराजा जैत्रसिंह ने जोधपुर में “जंबोला तालाब” का निर्माण करवाया, इसे विश्नोई समाज के लोग पुष्कर की तरह पवित्र स्थल मानते हैं |
  • जांभोजी ने सन् 1485 ईस्वी में बीकानेर के समराथल धोरे पर विश्नोई संप्रदाय का प्रवर्तन किया था |
  • जांभोजी ने जिन स्थानों पर उपदेश दिए वह स्थान “सांथरी” कहलाए |
  • जांभोजी को पर्यावरण संत व पर्यावरण वैज्ञानिक भी कहा जाता है |

 

दादू सम्प्रदाय

  • दादू संप्रदाय के संस्थापक दादू दयाल जी है, इनका जन्म अहमदाबाद गुजरात में 1544 ईस्वी में हुआ था |
  • दादू दयाल जी के गुरु वृद्धानंद जी थे | दादू संप्रदाय का उपनाम “कबीरपंथी संप्रदाय” हैं |
  • दादू संप्रदाय का ग्रंथ “दादू वाणी व दादू जी का दोहा” है | दादू ग्रंथ की भाषा सधुकड़ी है |
  • दादू संप्रदाय की प्रधान पीठ जयपुर के नारायण क्षेत्र में है |
  • दादू जी ने जयपुर में भैराणा की पहाड़ियां पर तपस्या की थी|
  • दादू जी के 52 शिष्य थे, जिन्हें 52 स्तंभ कहते हैं |
  • दादू जी के 52 शिक्षकों में उनके 2 पुत्र गरीब दास व मिस्किन दास भी शामिल थे |

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लाल दासी सम्प्रदाय

  • लाल दासी संप्रदाय मेवात क्षेत्र का एक लोकप्रिय संप्रदाय हैं |
  • संत लाल दासी संप्रदाय के संस्थापक लालदास जी है |
  • लाल दास जी का जन्म अलवर के धोली धूव गांव में हुआ |
  • संत लाल दास जी की समाधि अलवर के शेरपुरा में स्थित है |
  • लालदास जी को तिजारा नामक स्थान से ज्ञान की प्राप्ति हुई|
  • लाल दासी संप्रदाय की प्रधान पीठ भरतपुर के नगला जहाज में है |

 

चरणदासी सम्प्रदाय

  • चरणी दासी संप्रदाय की प्रधान पीठ दिल्ली में स्थित है |
  • चरणदासी संप्रदाय के संस्थापक चरण दास जी थे |
  • चरण दास जी का जन्म अलवर के डेहरा गांव में हुआ था |
  • चरण दास जी का वास्तविक नाम रणजीत सिंह डाकू था |
  • आपको बता दें कि चरण दास जी ने भारत में नादिर शाह द्वारा आक्रमण करने की भविष्यवाणी भी की थी |
  • चरणदासी संप्रदाय मेवात क्षेत्र का लोकप्रिय संप्रदाय है |

वैष्णव धर्म सम्प्रदाय

वैष्णव धर्म संप्रदाय की चार प्रमुख शाखाएं हैं !

1. वल्लभ सम्प्रदाय

2. हंस सम्प्रदाय

3. रामानुज सम्प्रदाय

4. गौड़ सम्प्रदाय

 

वैष्णव धर्म संप्रदाय की चार प्रमुख शाखाओं की जानकारी विस्तार से निम्नलिखित हैं – राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय

1. वल्लभ सम्प्रदाय

  • वल्लभ संप्रदाय को “पुष्ठी मार्ग” सम्प्रदाय भी कहते हैं |
  • इस संप्रदाय का संस्थापक आचार्य वल्लभ जी थे |
  • आचार्य वल्लभ जी के पुत्र विट्ठलनाथजी द्वारा अष्टछाप मंडली बनाई गई, जो इस संप्रदाय का प्रचार-प्रसार करती थी|
  • इस संप्रदाय का मंदिर व प्रधान पीठ “श्रीनाथ मंदिर” नाथद्वारा (राजसमंद) में स्थित है, जिसे प्राचीन नाम सिहाड़ से जाना जाता है |
  • सन 1669 ईस्वी में मुगल राजा औरंगजेब द्वारा हिंदू मंदिरों व मूर्तियों को तोड़ने के आदेश देने के बाद श्रीनाथजी की मूर्ति को वृंदावन से “मेवाड़” लाया गया |
  • यहां पर राजा राज सिंह ने 1672 ईस्वी में नाथद्वारा में श्रीनाथजी की मूर्ति को स्थापित करवाया था, जो बनास नदी के किनारे पर स्थित हैं |
  • आपको बता दें कि वल्लभ संप्रदाय के लोग दिन में 8 बार श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा अर्चना करता है |

 

2. हंस सम्प्रदाय

  • हंस सम्प्रदाय को “निम्बार्क सम्प्रदाय” भी कहा जाता है |
  • इस संप्रदायिक के संस्थापक आचार्य निम्बार्क थे |
  • इस संप्रदाय का पवित्र ग्रंथ “परशुराम सागर” ग्रंथ है |
  • यह संप्रदाय कृष्ण राधा के युगल रूप की पूजा अर्चना करता है |

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3. रामानुज सम्प्रदाय

  • रामानुज संप्रदाय को रामावत/रामानंदी संप्रदाय भी कहा जाता है |
  • इस संप्रदाय के संस्थापक आचार्य रामानुज जी है |
  • रामानुज संप्रदाय की शुरुआत दक्षिण भारत के आंध्र प्रदेश से शुरू हुई थी |
  • उत्तर भारत में इस संप्रदाय की की नीव रामानुज के परम शिष्य रामानंद जी ने रखी थी, इसीलिए उत्तर भारत में इस संप्रदाय को रामानुज संप्रदाय कहा जाता है |

4. गौड़ सम्प्रदाय

  • गौड़ संप्रदाय को “ब्रहा्र सम्प्रदाय” भी कहा जाता है |
  • इस संप्रदाय का प्रचार अकबर के शासनकाल में हुआ था |
  • राजस्थान में इस संप्रदाय का सबसे ज्यादा प्रचार-प्रसार जयपुर नरेश मानसिंह के शासनकाल में हुआ था |
  • मानसिंह ने वर्तमान में इस संप्रदाय का गोविंद देव जी का मंदिर निर्मित करवाया था

 

शैवमत सम्प्रदाय

शैवमत समुदाय की चार प्रमुख शाखा निम्नलिखित हैं –

1. कापालिक

  • इस संप्रदाय के साधु तांत्रिक विद्या का प्रयोग करते हैं |
  • कापालिक समुदाय के साधु श्मशान भूमि में रहते हैं |
  • इन कापालिक साधुओं को अघोरी बाबा कहा जाता है |
  • कापालिक संप्रदाय के लोग भगवान शिव के अवतार के रूप में भैख की पूजा करते हैं |

2. पाशुपत संप्रदाय

  • पशुपति संप्रदाय दिन में अनेक बार भगवान शिव की पूजा अर्चना करते हैं |
  • यह संप्रदाय मेवाड़ से जुड़े हुए संप्रदाय से हैं |

नाथ सम्प्रदाय

  • नाथ संप्रदाय “शैवमत संप्रदाय” की एक शाखा है |
  • इसके संस्थापक नाथ मुनि जी है |
  • नाथ संप्रदाय के प्रमुख साधु गोरखनाथ, गोपीचंद नाथ, चिड़िया नाथ, जालंधर नाथ, आयस देव नाथ, देवनाथ मत्स्येंद्रनाथ आदि है |
  • जोधपुर के राजा मानसिंह ने नाथ संप्रदाय से प्रभावित होकर नाथ संप्रदाय के राधु आयुष देवनाथ को अपना गुरु माना था|
  • राजा मानसिंह ने जोधपुर मेे इसलसंप्रदाय का मुख्य मंदिर महा मंदिर (जोधपुर) में स्थापित करवाया |
  • नाथ संप्रदाय की दो प्रमुख शाखाएं हैं, जो एक जोधपुर में व दूसरी पुष्कर में हैं |

रामस्नेही सम्प्रदाय

  • रामस्नेही संप्रदाय के लोग निर्गुण भक्ति में विश्वास रखते हैं |
  • इस संप्रदाय की स्थापना रामानंद जी के शिष्य ने की थी |
  • इस संप्रदाय के साधु गुलाबी रंग के वस्त्र धारण करते हैं |

राजा राम सम्प्रदाय

  • राजाराम संप्रदाय मारवाड़ क्षेत्र का एक लोकप्रिय संप्रदाय है |
  • राजाराम समुदाय के संस्थापक राजारामजी पर्यावरण प्रेमी थे|
  • संत राजाराम ने हमेशा वन एवं वन्य जीवन को बचाने हेतु अन्य प्रयास किए |
  • राजाराम संप्रदाय के संस्थापक राजारामजी है |
  • राजाराम संप्रदाय के प्रधान पीठ शिकारपुरा गांव जोधपुर में है |

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नवल सम्प्रदाय

  • नवल संप्रदाय सबसे ज्यादा नागौर व जोधपुर क्षेत्र में लोकप्रिय है |
  • इस संप्रदाय के संस्थापक नवल दास जी है |
  • नवल संप्रदाय की प्रधान पीठ जोधपुर में स्थित है |

अलखिया सम्प्रदाय

  • अलखिया संप्रदाय की प्रधान पीठ बीकानेर व चूरू में है |
  • स्वामी लाल गिरी जी अलखिया समुदाय के संस्थापक है |
  • अलखिया समुदाय के पवित्र ग्रंथ अलग प्रस्तुति प्रकाश है |

निरजंनी सम्प्रदाय

  • निरंजनी संप्रदाय के संस्थापक संत हरिदास जी थे |
  • संत हरिदास जी का जन्म कापडौद में हुआ, जो नागौर में स्थित है |
  • निरंजनी संप्रदाय की २ निहंग व घरबारी प्रमुख शाखाएं हैं |
  • निरंजनी संप्रदाय की प्रधान पीठ नागौर के गाढा में है |

निष्कंलक सम्प्रदाय

  • निष्कलंक संप्रदाय के संस्थापक संत मावजी थे |
  • संत मावजी का जन्म साबला ग्राम डूंगरपुर में हुआ था |
  • निष्कलंक संप्रदाय के संस्थापक संत मावजी बांगढ़ क्षेत्र में अत्यंत लोकप्रिय थे |
  • संत मावजी को बेणेश्वर धाम डूंगरपुर में ज्ञान की प्राप्ति हुई थी |
  • संत मावजी ने चैपडा नामक ग्रंथ लिखा था |

तेरापंथी संप्रदाय

  • तेरापंथी संप्रदाय के संस्थापक आचार्य भिक्षु स्वामी हैं |
  • यह संप्रदाय संपूर्ण राजस्थान में निवास करता है |
  • तेरापंथी संप्रदाय का मुख्य केंद्र जोधपुर जिले में कंटालिया गांव है |
  • इस संप्रदाय का प्रमुख अनुयाई जैन श्वेतांबर है |
  • इस संप्रदाय की प्रमुख पीठ जोधपुर में है |

राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय

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अंतिम शब्द

हम उम्मीद करते हैं कि यह आलेख आपको जरूर पसंद आएगा, क्योंकि इस आलेख में हमने आपको राजस्थान के सभी संप्रदाय के बारे में विस्तार से जानकारी दी है | जैसे- राजस्थान के प्रमुख संप्रदाय कौन-कौन से हैं। राजस्थान के प्रमुख समुदाय व सम्प्रदाय

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