राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं? Rajasthan Ke Pramukh Sangrahalaya Hindi

राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं?– इतिहास काल में राजस्थान एक समृद्ध राज्य था, क्योंकि यहां के शासक राजपूत योद्धा थे, जिन्होंने तलवार की धार से विदेशी ताकतों का सामना किया और उन्हें भारत की भूमि से खदेड़ फेंका।

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राजपूत योद्धाओं ने युद्ध के दौरान विदेशी ताकतों को राजपूत शक्ति का एहसास दिलाया। राजपूत शासकों ने युद्ध के दौरान अपने नीति नियम और धर्म को मानते हुए अनेक विजय प्राप्त की थी।

इतिहास काल से राजस्थान की समृद्धि

राजस्थान के राजपूत अपने राजशी शान-शौकत, रजवाड़ी पोशाके, मान-मर्यादा, भाषा-विचार, मेहमान-नवाजी, खानपान, अद्भुत शिल्पकला और अद्भुत व आकर्षक प्राचीन महल, किले, हवेलिया इत्यादि के लिए राजस्थान का इतिहास संपूर्ण दुनिया में जाना जाता है। राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय –

राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं?
राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं?

प्राचीन काल में राजपूत राजाओं द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली वस्तुएं, उनके द्वारा पहने जाने वाले वस्त्र, वैवाहिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम में पहनने वाली पोशाके, शरीर के आभूषण, खानपान की वस्तुएं, बर्तन, सजावटी सामान, उस समय के कागज और हिसाब किताब, राजा महाराजाओं की तस्वीरें, शिलालेख, राजपूत काल की मुद्रा इत्यादि। सभी प्राचीन राजा महाराजाओं की वस्तुओं को राजस्थान के अनेक संग्रहालय में रखी गई है।

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राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन-कौनसे हैं?

  • जयपुर राजकीय संग्रहालय
  • जोधपुर राजकीय संग्रहालय
  • अलवर राजकीय संग्रहालय
  • भरतपुर राजकीय संग्रहालय
  • बीकानेर राजकीय संग्रहालय
  • आहड़ राजकीय संग्रहालय
  • आमेर राजकीय संग्रहालय
  • डूंगरपुर राजकीय संग्रहालय
  • हनुमानगढ़ राजकीय संग्रहालय
  • जैसलमेर राजकीय संग्रहालय
  • मंडोर राजकीय संग्रहालय
  • उदयपुर राजकीय संग्रहालय
  • पाली राजकीय संग्रहालय
  • कोटा राजकीय संग्रहालय
  • झालावाड़ राजकीय संग्रहालय
  • माउंट आबू राजकीय संग्रहालय
  • एल्बर्ट हॉल म्यूजियम
  • हल्दीघाटी संग्रहालय
  • उमेद पैलेस भवन संग्रहालय
  • युद्ध संग्रहालय
  • मीरा संग्रहालय

राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय- Major Museums of Rajasthan in Hindi

आहड़ – राजकीय संग्रहालय

इस राजकीय संग्रहालय में 4000 वर्षों पुराना सभ्यता के पूराअवशेष मौजूद है। इसमें हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता के भी मृदभाण्ड मौजूद है।

आमेर- राजकीय संग्रहालय

आमेर में स्थित राजकीय संग्रहालय 16वीं शताब्दी मे निर्मित अंबर किले में स्थित हैं। इस संग्रहालय में प्राचीन काल के पुरस्कार और उस समय के कलाकारों का नाम और उनकी आवाज इत्यादि मौजूद है। यह दुनिया के सबसे खूबसूरत संग्रहालय में से एक हैं।

भरतपुर- संग्रहालय

इस संग्रहालय में प्राचीन राजस्थान के समय के सिक्के, धातु की वस्तुएं, लघु चित्र और स्थानीय कला, हथियार, शिलालेख, वस्तु, पत्थर की मूर्तियां, पत्र इत्यादि सुरक्षित रखे गए हैं। यह संग्रहालय भरतपुर के लोहागढ़ किले में स्थित है।

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चित्तौड़गढ- राजकीय संग्रहालय

यह संग्रहालय चित्तौड़गढ़ में स्थित हैं। इसका निर्माण महाराजा फतेह सिंह ने अपने शासनकाल में करवाया था। 19वीं शताब्दी का यह संग्रहालय शुरुआत में फतेह प्रकाश पैलेस का एक हिस्सा था। इस संग्रहालय में चित्तौड़ से संबंधित कलाकृतियां के नमूने और भी अनेक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक तथ्य रखे हुए हैं।

हल्दीघाटी संग्रहालय

वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप का नाम तो देश और संपूर्ण दुनिया जानती ही है, लेकिन अगर आप महाराणा प्रताप के जीवन के बारे में और उनके जीवन पर आधारित सच्ची घटनाएं और उनके द्वारा इस्तेमाल किए हुए हथियारों के बारे में जानना चाहते हैं?

तो आप राजस्थान के राजसमंद में जा सकते हैं। इस संग्रहालय में महाराणा प्रताप के जीवन से जुड़ी हुई घटनाएं और ऐतिहासिक, सांस्कृतिक धरोहर के मुख्य तथ्य सुरक्षित रखे हुए हैं। यह संग्रहालय गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है।

राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं?
राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय कौन कौनसे हैं?

मीरा – संग्रहालय

राजस्थान की कृष्ण भक्त मीरा बाई से जुड़ी हुई ऐतिहासिक और साहित्यिक वस्तुए व उनके बारे में जानकारी इस संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है। इसीलिए इस संग्रहालय का नाम मीरा संग्रहालय रखा गया है। यहां संग्रहालय उदयपुर में स्थित हैं। मीराबाई का एक और संग्रहालय नागौर जिले के मेड़ता में स्थित है।

उम्मेद भवन पैलेस- संग्रहालय

उम्मेद भवन पैलेस संग्रहालय का निर्माण महाराजा उम्मेद सिंह ने सन 1929 में जोधपुर में करवाया था। इस संग्रहालय में जोधपुर के महाराजा हनवंत सिंह और उमेद सिंह के शासनकाल में हवाई उड़ानों के एयरक्राफ्ट के विभिन्न मॉडल यहां पर रखे हुए हैं।

राजस्थान- राज्य अभिलेखागार

राजस्थान का यह अभिलेखागार बीकानेर में स्थित है। इसकी स्थापना 1960 में की गई थी। इस संग्रहालय में राजस्थान इतिहास की लिखित सामग्री सुरक्षित रखी हुई है।

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डूंगरपुर- राजकीय संग्रहालय

डूंगरपुर में स्थित इस राजकीय संग्रहालय में लगभग 200 देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई है। इस राजकीय संग्रहालय का निर्माण 9089 में किया गया था।

हनुमानगढ़- कालीबंगा संग्रहालय

कालीबंगा संग्रहालय 2700 ईसा पूर्व की हड़प्पा सभ्यता की कलाकृतियां और उस समय की प्रमुख वस्तुए। जैसे- पत्थर, गोल पत्थर, कपड़े, बर्तन, चूड़ियां, मोहरा, मुद्राएं, मूर्तियां और भी अनेक प्रकार की वस्तुएं रखी गई है।

जैसलमेर- राजकीय संग्रहालय

इस राजकीय संग्रहालय की नींव सन् 1979 में रखी गई थी। इस संग्रहालय में राजस्थान की प्रमुख प्राचीन वस्तुएं रखी हुई है। बता दें कि यह राजस्थान का एकमात्र ऐसा संग्रहालय है जिसमें सबसे प्राचीन वस्तुएं रखी हुई है। यह संग्रहालय जैसलमेर जिले के पोकरण में स्थित है।

झालावाड़- राजकीय संग्रहाल

झालावाड़ में स्थित राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1915 ईस्वी में की गई थी। इस संग्रहालय में प्रमुख प्राचीन वस्तुएं रखी हुई है। यह राजस्थान का सबसे पुराना संग्रहालय हैं।

मेहरानगढ़ संग्रहालय – जोधपुर

मेहरानगढ़ संग्रहालय जोधपुर में स्थित है। यह संग्रहालय किले में मौजूद है, जो मेहरानगढ़ नाम से विश्व भर में प्रसिद्ध है। इस संग्रहालय में जोधपुर के सभी राजपूत राजाओं की वस्तुएं, कपड़े, आभूषण, धातु, लकड़ी और मिट्टी के बर्तन इसके अलावा अनेक सारी प्राचीन वस्तुएं इस संग्रहालय में मौजूद हैं।

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कोटा – संग्रहालय

यह राजकीय संग्रहालय पर्यटक की दृष्टि से आकर्षक का प्रमुख केंद्र हैं। यहां पर दूरदराज से लोग पुराने महल में स्थित इस संग्रहालय को देखने के लिए आते हैं। अनेक प्रकार की प्राचीन कलात्मक वस्तुएं रखी हुई है।

मंडोर- राजकीय संग्रहालय

राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित मंडोर राजकीय संग्रहालय पर्यटकों का प्रमुख स्थल है। यहां पर अनेक प्रकार के मूर्तियां, शिलालेख, वास्तु कला, खुदाई से प्राप्त अवशेष एवं हस्तकला की वस्तुएं रखी हुई है। यहां पर राजा महाराजाओं की प्राचीन छतरियां बनी हुई है।

सवाई मान सिंह- संग्रहालय

इस संग्रहालय को जयपुर के सिटी पैलेस में 1732 ईस्वी में तत्कालीन महाराजा सवाई जयसिंह द्वितीय ने अपने शासनकाल में बनाया था। इस संग्रहालय में 18 से 20वी शताब्दी तक के तस्वीरें और चित्र सुरक्षित रखे गए हैं। यह संग्रहालय शिक्षा और कला के संरक्षण का प्रमुख केंद्र है।

प्राच्य विद्या- संग्रहालय

जोधपुर में स्थित इस संग्रहालय की स्थापना सन 1955 ईस्वी में की गई थी। इस संग्रहालय में कपड़ा, कागज, भोजपत्र, ताम पत्र, शाही फरमान इत्यादि पर लिखित ग्रंथ रखे गए हैं।

माउण्ट आबू – राजकीय संग्रहालय

राजकीय संग्रहालय की स्थापना 1962 में की गई थी। यहां पर प्राचीन राजस्थान की अनेक प्रकार की महत्वपूर्ण वस्तुएं रखी हुई है।

पाली – राजकीय संग्रहालय

इस संग्रहालय का उद्घाटन सन 1991 को हुआ था। इस संग्रहालय में प्राचीन समय की वस्तुएं और कलात्मक सामग्रियां रखी हुई है। राजस्थान के पाली में स्थित इस संग्रहालय में खुदाई में प्राप्त वस्तु और अवशेष रखे हुए हैं।

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एल्बर्ट हॉल म्यूजियम

Albert Hall museum का निर्माण 1876 ईस्वी में जयपुर के रामनिवास बाग में करवाया गया था। इसका निर्माण जयपुर के तत्कालीन महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय ने अपने शासनकाल में करवाया था, जिसे सन 1886 में संपूर्ण जनता के लिए इसके द्वार खोल दिए थे।

इस संग्रहालय में अनेक प्रकार की रंग-बिरंगी वस्तुएं, मूर्तियां, कीमती पत्थर, हाथी के दांत, पुराने वस्त्र, चित्र, दरिया, पोशाके, राजा महाराजाओं के आभूषण इत्यादि सुरक्षित रखे गए हैं।

अलवर- राजकीय संग्रहालय

अलवर में स्थित इस संग्रहालय में प्राचीन समय की कलाकृतियां, मूर्तियां, शिलालेख, सिक्के, पेंटिंग, हथियार, और राजवंशिय परिवार की संपूर्ण जानकारी की वस्तुएं रखी हुई है। इस संग्रहालय का निर्माण 1940 में करवाया गया था।

बागोर हवेली – संग्रहालय

उदयपुर में स्थित यह संग्रहालय 18 कमरों से बना एक बड़ा संग्रहालय हैं, जिसे 1997 में भारत के प्रमुख संग्रहालय में शामिल किया गया था। इस संग्रहालय में राजपूत राजाओं की जीवन शैली, राजा महाराजाओं के वेशभूषा, अस्त्र-शस्त्र, आभूषण और उनके मनोरंजन के साधन इत्यादि सुरक्षित रखे गए हैं।

विराटनगर- राजकीय संग्रहालय

विराटनगर संग्रहालय में मुगलकालीन छायाचित्र, मुगलों के सिक्के और मुगलकालीन वस्तुएं रखी हुई है। इस संग्रहालय में मौर्यकालीन चांदी के सिक्के और मौर्य शासकों की प्रमुख वस्तुएं भी रखी हुई है।

युद्ध संग्रहालय

युद्ध संग्रहालय की स्थापना 2015 में जैसलमेर में की गई थी। इस संग्रहालय में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय में इस्तेमाल किए गए हथियार, टैंक, विमान और अन्य सैन्य वाहन और सामग्री इस संग्रहालय में सुरक्षित रखी गई है।

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बता दें कि 1965 में हुए भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत ने शानदार विजय प्राप्त की थी। उस समय युद्ध में इस्तेमाल होने वाले सभी हथियार और वस्तुओं को आप इस संग्रहालय में देख सकते हैं। यह राजस्थान का प्रथम युद्ध संग्रहालय है।

अंतिम शब्द

राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय के विषय में पूरी जानकारी इस लेख में हमने आपको विस्तार से बता दी है। तो हम उम्मीद करते हैं कि राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय की यह जानकारी आपको जरूर पसंद आई होगी।

अगर आपके परिवार या मित्र राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय के बारे में विस्तार से जानना चाहते हैं, तो उन्हें आप इस आर्टिकल को जरूर शेयर करें। राजस्थान के प्रमुख संग्रहालय।

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