राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली – पूरी जानकारी विस्तार से |

राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली – राजस्थान अपनी अदभुत संस्कृति और चित्र शैली के लिए जाना जाता है | राजस्थान में राजपूताना शैली प्रमुख चित्रकला है ! क्योंकि राजस्थान में चित्रकला का उद्भव राजपूताना काल में हुआ था|

राजस्थान के प्रत्येक क्षेत्र में अपने-अपने शासनकाल में राजपूत राजाओं ने रियासत और अपनी रुचि के अनुकूल चित्र शैली का निर्माण करवाया जो निम्न प्रकार हैं |

राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली कौन-कौन सी है?

1. मेवाड़ चित्र शैली
2. मारवाड़ चित्र शैली
3. ढूॅढाड़ चित्र शैली
4. जोधपुर चित्र शैली
5. अलवर चित्र शैली
6. नाथद्वारा चित्र शैली
7. बीकानेर चित्र शैली
8. बूॅदी चित्र शैली
9. किशनगढ़ चित्र शैली

राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली
                    राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली

राजस्थान की प्रमुख चित्रशैली / चित्रकला

मेवाड़ चित्र शैली

राजस्थान की सबसे प्राचीनतम चित्र शैली मेवाड़ चित्र शैली है| मेवाड़ चित्र शैली की रचना सन 1261 ई० में मेवाड़ के तत्कालीन महाराजा तेज सिंह ने करवाई थी | मेवाड़ चित्र शैली का “श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णी” प्रथम चित्र ग्रंथ है |

मेवाड़ के महाराजा अमर सिंह ने अपने शासनकाल में मेवाड़ चित्र शैली का सर्वाधिक विकास करवाया | महाराजा अमर सिंह ने अपने शासनकाल में रामायण, महाभारत, भागवत, रागमाला व गीत गोविंद इत्यादि कथाओं व ग्रंथों पर चित्र बनवाएं |

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मेवाड़ के महाराजा जगत सिंह के शासनकाल को मेवाड़ चित्र शैली का स्वर्ण युग माना जाता है, क्योंकि इस काल में मेवाड़ चित्र शैली में लाल एवं काले रंगों का प्रयोग हुआ | मेवाड़ में जो चित्र शैली का निर्माण हुआ उसमें सबसे ज्यादा श्रीकृष्ण की लीलाओं पर आधारित चित्र अंकित है |

मारवाड़ चित्र शैली

मारवाड़ चित्र शैली संपूर्ण राजस्थान में प्रसिद्ध है | ऐसा चित्र शैली में सर्वाधिक पीले व लाल रंगों का प्रयोग किया गया है | मारवाड़ चित्र शैली में सबसे ज्यादा आम के वृक्षों का चित्र अंकित किया हुआ है |

इस चित्र शैली में ढोला-मारू, राग-रागिनी तथा धार्मिक ग्रंथों व कथाएं पर आधारित चित्र बने हुए हैं | मारवाड़ चित्र शैली में सबसे ज्यादा श्रंगार पर आधारित चित्रांकन हुआ है |

मारवाड़ के शासक राव मालदेव के शासनकाल में मारवाड़ चित्र शैली पर मुगल चित्र शैली का प्रभाव पड़ने से मुगल चित्र शैली से प्रभावित मारवाड़ की चित्र शैली “जोधपुर चित्र शैली” कहलाने लगी | इस चित्र शैली का सबसे श्रेष्ठ चित्र 1623 ई० मे वीरजी नामक चित्रकार द्वारा बनाया गया “राग-माला” का चित्र था | राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली

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ढूॅढाड़ चित्र शैली

ढूॅढाड़ चित्र शैली में चांदी तथा मोतियों का उपयोग किया गया है | इस चित्र शैली में धार्मिक ग्रंथों तथा लोक संस्कृति के ग्रंथों पर आधारित चित्र बनाए गए हैं | ढूंढाड चित्र शैली के जिस स्वरूप पर मुगल शैली का प्रभाव पड़ा वह “आमेर चित्र शैली” कहलाई थी |

आमेर चित्र शैली का सर्वाधिक विकास महाराजा मानसिंह के शासनकाल में हुआ | आमेर चित्र शैली का स्वर्ण युग सवाई प्रताप सिंह का शासन काल माना जाता है, क्योंकि तत्कालीन राजा सवाई प्रताप सिंह ने आमेर चित्र शैली में पपया, हाथी, मोर, पीपल व बरगद के पेड़ों का भी चित्रांकन करवाया था |

ढूॅढाड़ चित्र शैली मुख्य रूप से जयपुर के आसपास वाले क्षेत्रों में विकसित हुई थी | ढूॅढाड़ चित्र शैली में लाल-पीले व हरे सुनहरे रंगों से चित्रांकन किया गया है | आमेर चित्र शैली का आरंभ राजा राव भारमल के शासन काल से माना जाता है |

राजस्थान की प्रमुख चित्रकला
                           राजस्थान की प्रमुख चित्रकला

जोधपुर चित्र शैली

जोधपुर चित्र शैली का सबसे ज्यादा विकास जोधपुर के तत्कालीन महाराजा अभयसिंह के शासनकाल में हुआ था | जोधपुर चित्र शैली को महाराजा जसवंत सिंह, महाराजा अभय सिंह, महाराजा सुर सिंह तथा महाराजा अजीतसिंह ने संरक्षण दिया था | जोधपुर की चित्र शैली मारवाड़ के चित्र शैली की तरह फली-फुली और प्रसिद्ध है |

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किशनगढ़ चित्र शैली

किशनगढ़ चित्र शैली का स्वर्ण युग महाराजा सावन्त सिंह के शासनकाल को माना जाता है | किशनगढ़ चित्र शैली को राजस्थान की “राज्य प्रतिनिधि चित्र शैली” भी कहां जाता है |

इस चित्र शैली में किशनगढ़ का स्थानीय “गोदाला नामक तालाब” का चित्रांकन किया गया है | इस चित्र शैली में सर्वाधिक नारियल के वृक्ष का चित्रांकन देखने को मिलता है |

बनी-ठनी को राजस्थान की मोनालिसा कहा जाता है, जिसका प्रथम चित्र मोरध्वज निहालचंद के द्वारा बनाया गया था | महाराजा सावंत सिंह (का शासनकाल जो इतिहास में नागरीदास के नाम से प्रसिद्ध है) ने अपनी प्रेयसी बनी-ठनी की स्मृति में अनेको चित्र किशनगढ़ शैली में बनवाए थे |

बूॅदी चित्र शैली

बूंदी चित्र शैली हाडोती के सबसे प्राचीन चित्र शैली है | बूंदी चित्र शैली में सबसे ज्यादा चंपा के वक्षों का चित्रांकन किया गया है | बूंदी चित्र शैली में लाल, पीले और हरे रंगों को ज्यादा प्रयोग किया गया है | बूंदी शासक राव सुरतन ने हाडा के काल में बूंदी चित्र शैली का सबसे ज्यादा विकास करवाया|

महाराजा उम्मेद सिंह के शासनकाल में बनी चित्रशाला बूंदी चित्र शैली का सबसे श्रेष्ठ उदाहरण है | बूंदी चित्र शैली में अधिकांश तौर पर पशु-पक्षी व पेड़ों के चित्र अंकित है | सबसे ज्यादा पशु-पक्षियों को बूंदी चित्र शैली में ही महत्व दिया गया है |

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इस चित्र शैली में सबसे ज्यादा धार्मिक कथाओं पर बने हुए चित्र अंकित है | बूंदी चित्रकला शैली से ही “कोटा चित्र शैली” का उद्भव हुआ है |

अलवर चित्र शैली

अलवर चित्र शैली राजस्थान की एकमात्र ऐसी चित्र शैली है जिसमें मुगल बादशाहों व मुगल गणिकाओं के चित्र अंकित हैं| अलवर चित्र शैली के लिए महाराजा विनय सिंह का शासन काल स्वर्ण युग माना जाता है | इस चित्र शैली में पेड़ पौधे व पशु-पक्षियों के साथ-साथ राजा महाराजाओं के भी चित्र अंकित है |

इस अलवर चित्र शैली का विकास दिल्ली की चित्र शैली व आमेर चित्र शैली के माध्यम से हुआ | मुगल चित्र शैली का सबसे ज्यादा प्रभाव अलवर चित्र शैली पर पड़ा | अलवर की चित्र शैली को मौलिक स्वरूप महाराजा बख्तावर सिंह के समय प्राप्त हुआ |

नाथद्वारा चित्र शैली

नाथद्वारा चित्र शैली में सबसे ज्यादा श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर आधारित चित्र अंकित है | महाराजा राज सिंह ने अपने शासनकाल में 1672 राजसमंद के नाथद्वारा में श्रीनाथजी के मंदिर की स्थापना के साथ ही “नाथद्वारा शैली” का विकास करवाया था |

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इस चित्र शैली को “वल्लभ चित्र शैली” नाम से भी जाना जाता है | नाथद्वारा चित्र शैली में किशनगढ़ का श्रृंगार, ब्रज की प्रेम लीलाएं, मेवाड़ की वीरता का उल्लेख मिलता है |8

बीकानेर चित्र शैली

बीकानेर चित्र शैली राजस्थान की एकमात्र ऐसी चित्र शैली है जिसमें चित्रकारों ने चित्र के साथ अपने नाम भी लिखें हैं | महाराजा अनूप सिंह के शासनकाल में बीकानेर चित्र शैली का सबसे ज्यादा विकास हुआ है |

इस बीकानेर चित्र शैली में धार्मिक ग्रंथों व धार्मिक कहानियों पर आधारित चित्र अंकित है | बीकानेर के महाराजा करणी सिंह के शासनकाल में इस चित्र शैली में सबसे ज्यादा चित्र बनाए गए थे | बीकानेर चित्र शैली के कलाकारों को ‘उस्ताद’ कहते हैं | बीकानेर की चित्र शैली मारवाड़ शैली की ‘उप शैली’ के रूप में विकसित हैं |

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अंतिम शब्द

इस लेख में राजस्थान की चित्रकला व राजस्थान की चित्र शैली के बारे में संपूर्ण जानकारी बताई गई है | अलवर चित्र शैली, मारवाड़ चित्र शैली, नाथद्वारा चित्र शैली, बीकानेर चित्र शैली, जयपुर चित्रकला, मारवाड़ चित्रकला, जोधपुर चित्रकला, बूंदी चित्र शैली, किशनगढ़ चित्र शैली, नाथद्वारा चित्र शैली, जोधपुर चित्रशैली, मेवाड़ चित्र शैली |

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राजस्थान की प्रमुख चित्रकला/चित्रशैली – इत्यादि संपूर्ण जानकारी हमने इस आलेख में आपको बताई हैं | तो उम्मीद करते हैं कि यह आलेख आपको जरूर पसंद आया होगा | इस Article को Share जरूर करें |

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