राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ कौन-कौनसी है? पूरी जानकारी

राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ – प्राचीन समय में राजस्थान एक समृद्ध राज्य था, यहां पर अनेक सारी छोटी-बड़ी रियासतें थी। प्राचीन समय में राजस्थान में जल का प्रबंधन भी अद्भुत और दुर्लभ था।

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राजस्थान में प्राचीन समय में बने हुए महल, किले, गढ़, हवेलिया, दुर्ग इत्यादि की तरह पानी का प्रबंध करने के लिए बनाए हुए नहर, तालाब, कुएं और बावडियाँ भी अद्भुत और आकर्षक है।

राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ – Rajasthan Ki Parmukh Bhawadiya

राज्य में प्राचीन समय में बने हुए बड़े-बड़े महल, दुर्ग, किले, गढ़ और हवेलियों से जो बारिश का पानी प्राप्त होता था। उसे महल के भीतर ही कुएं और बावडियाँ बनाकर संग्रहित कर लिया जाता था और इसे अनेक प्रकार की कलात्मक कलाओं से सजाया भी गया था।

वर्तमान समय में राजस्थान की बावड़ीयो प्रर्यटकों की दृष्टि से आकर्षक का प्रमुख केंद्र है। राजस्थान में स्थित प्राचीन कुएं और बावडियाँ पर अंकित राजस्थान की शिल्प कला, कलात्मक कलाकारी, लोक देवी-देवताओं के चित्र, उन पर बने हुए डिजाइन, अद्भुत और आकर्षक है।

राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ कौन-कौनसी है?
राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ कौन-कौनसी है?

प्राचीन समय में पानी का संग्रहण करने हेतु बनाए गए कुएं और बावडियों पर पत्थर पर बनाई हुई कलात्मक डिजाइन देखने योग्य है। राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ.

Rajasthan Ki Parmukh Bhawadiya

आइए आज हम आपको राजस्थान की प्रमुख बावडियाँ की पूरी जानकारी विस्तार से बताएंगे। जैसे – राजस्थान की बावड़ी, राजस्थान की बावडियाँ, राजस्थान की प्राचीन बावडियाँ, राजस्थान में स्थित प्राचीन बावरिया, राजस्थान की बावड़ियां कौन-कौन सी है, राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ।

राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ कौन-कौनसी है?

चाँदबावड़ी

चांद बावड़ी को आभानेरी बावड़ी भी कहते हैं। यह बावड़ी दौसा जिले के बांदीकुई रेलवे स्टेशन के पास साबी नदी के निकट स्थित है, इसका निर्माण प्रतिहार वंश के शासक निकुंभ राजा चांद ने 8वीं सदी में करवाया था।

नीमराणा की बावड़ी

नीमराणा की बावड़ी राजस्थान के अलवर जिले में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण राजा टोडरमल ने करवाया था। यह प्राचीन बावड़ी 9 मंजिला है।

नौलखा बावड़ी

नौलखा बावड़ी का निर्माण चौहान वंश की रानी पेमल ने करवाया था, जो चौहान शासक राजा अशोक कर्ण की पत्नी थी। नौलखा बावड़ी डूंगरपुर में स्थित है।

सीतारामजी की बावड़ी

सीताराम जी की बावड़ी भीलवाड़ा में स्थित है। इस बावड़ी में एक गुफा बनी हुई है, जिसमें बैठकर रामस्नेही संप्रदाय के प्रवर्तक स्वामी रामचरण जी ने 36000 पदों की रचना की थी। उसी समय रामचरण जी ने रामस्नेही संप्रदाय की स्थापना भी की थी। यह बावड़ी अत्यंत प्राचीन और अद्भुत है।

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गुलाब सागर

गुलाब सागर का निर्माण महाराजा विजय सिंह ने अपने पासवान गुलाब राय की स्मृति में करवाया था। यह जलाशय जोधपुर में स्थित है, इसके अलावा जोधपुर में फतेहसागर, तखत सागर, पदम सर, रानी सागर इत्यादि जलाशय स्थित है।

रानीजी की बावड़ी

रानीजी की बावड़ी बूंदी में स्थित है। यह बावड़ी अद्भुत और आकर्षक है, इसीलिए इसे बावडियों का सिरमौर भी कहा जाता है। इस बावड़ी को राजा अनिरुद्ध सिंह की विधवा रानी ने 18 वीं शताब्दी के दौरान बनाया था।

अनारकली की बावड़ी

इस बावड़ी का निर्माण रानी नाथावत जी की दासी अनारकली ने राजस्थान के बूंदी जिले में में करवाया था। यहां एक प्राचीन बावड़ी है, जिसे देखने के लिए दूरदराज से लोग आते हैं। बूंदी में चंपा बाग की बावड़ी, गुल्ला की बावड़ी, पठान की बावड़ी इत्यादि अन्य प्रसिद्ध बावरिया मौजूद है।

बड़गाँव की बावड़ी

बड़गांव की बावड़ी कोटा में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण कोटा के तत्कालीन शासक क्षत्रसाल की पटरानी जादौण ने करवाया था। यह राजस्थान की प्राचीन बावरियों की सूची में शामिल है।

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पन्ना मीणा की बावड़ी

पन्ना मीना की बावड़ी का निर्माण 17 वी शताब्दी के दौरान करवाया गया था यह बावड़ी आमेर में स्थित है, जिसे मिर्जा राजा जयसिंह ने अपने शासनकाल में बनाया था।

त्रिमुखी बावड़ी

इस बावड़ी का निर्माण मेवाड़ के महाराणा राज सिंह की रानी रामरसदे ने करवाया था। यह बावड़ी डूंगरपुर जिले में स्थित है।

चमना बावड़ी

यह बावड़ी भीलवाड़ा के शाहपुरा में स्थित है, जिसका निर्माण सन 1800 में करवाया गया था। यह प्राचीन बावड़ी तीमंजिली है, जो भव्य और विशाल हैं।

औस्तीजी की बावड़ी

यहां बावड़ी भीलवाड़ा में स्थित है, यहां पर दो बावरिया बनी हुई है, जो पर्यटकों के लिए आकर्षक का केंद्र बनी हुई है।

गडसीसर सरोवर

जैसलमेर के रावल गडसी ने अपने शासनकाल में 1740 ईसवी में इस सरोवर का निर्माण करवाया था। यहां पर पन्नालाल शाह का तालाब, फतेह सागर तालाब, अजीत सागर तालाब इत्यादि जलाशय मौजूद है।

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हाड़ी रानी की बावड़ी

हड्डी रानी की बावड़ी अत्यंत विशाल है, जो टोंक में स्थित है। इससे बावड़ी का निर्माण वर्ष 1742 में करवाया गया था।

उदयबाव

उदयबाव डूंगरपुर में स्थित है। इस बावड़ी का निर्माण डूंगरपुर के महारावल उदय सिंह ने करवाया था। यहां प्राचीन बावड़ी पर्यटक का प्रमुख आकर्षक का केंद्र है।

तुंवरजी का झालरा

तुंवरजी का झालरा का निर्माण महाराजा अभयसिंह की रानी तुंवरजी जी ने करवाया था। यह एक प्राचीन जलाशय है।

तापी बावड़ी

तापी बावड़ी जोधपुर में स्थित है। इस बावड़ी के पास देवकुंड, नैंसी बावड़ी, हाथी बावड़ी और श्रीनाथजी का झालरा इत्यादि जलाशय भी मौजूद है।

डिग्गी तालाब

डिग्गी तालाब का निर्माण अजमेर की अजय मेरु पहाड़ियों के नीचे करवाया गया है। यह एक बड़ा जल स्रोत हैं। यहां पर मृगा बावड़ी, कनकाबाव, सरजाबाव इत्यादि जलाशय बने हुए हैं।

महिला बाग झालरा

महिला बाग झालरा का निर्माण महाराजा विजय सिंह की पासवान गुलाब राय ने करवाया था। यहां पर महिलाओं का लौटियों का मेला आयोजित होता था। यह जलाशय जोधपुर में गुलाब सागर के पास स्थित है।

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बाटाडू का कुआँ

रावल गुलाब सिंह ने बाड़मेर के बाटाडू गांव में कुआं का निर्माण करवाया था, जिसे रेगिस्तान का जल महल कहा जाता है।

अंतिम शब्द

आज के इस आर्टिकल में ” राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ ” के बारे में हमने आपको विस्तार से बताया है। तो हम उम्मीद करते हैं कि आपको यह जानकारी – राजस्थान की प्रमुख बावड़ियाँ ” जरूर पसंद आएगी।

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