राजस्थान की लोक देवियाँ – Rajasthan ki Pramukh Lok Deviya

राजस्थान की लोक देवियाँ – राजस्थान अपनी संस्कृति, रीति-रिवाज, जलवायु, ऐतिहासिक धरोहर व भक्ति के लिए दुनिया भर में जाना जाता है। राजस्थान की धरती पर अनेकों संत महात्मा व धर्मी सज्जन पैदा हुए। राजस्थान की लोक देवियाँ

राजस्थान की लोक देवियाँ

राजस्थान की धरती पर गायों की रक्षा, समाज कल्याण, धरती की रक्षा और अपने राज्य को स्वतंत्रा रखने हेतु वीरगति को प्राप्त सभी योद्धाओं को धर्मी योद्धाओं के रूप में पूजा जाता है। राजस्थान में वीर योद्धाओं को देवताओं के रूप में पूजने की एक मजबूत परंपरा है।

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राजस्थान में धर्म, भक्ति, संत, महात्मा और लोक देवता व लोग देवियों की अनेकों गाथाएं और मंदिर हर क्षेत्र में दिखाई देते है। आज के इस आर्टिकल में हम आपको राजस्थान के सभी लोग देवियों के बारे में विस्तार से बताएंगे – राजस्थान की लोक देवियाँ।

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राजस्थान की प्रमुख लोक देवियाॅ कौन सी है?

रानी सती लोक देवी

शीतला माता

शाकंभरी माता

आई माता

नारायणी माता

चामुंडा माता

पिपलाद माता

हिंगलाज माता

नागणेची माता

चौथ माता

कालका माता

आशापुरा माता

 

राजस्थान की लोक देवियाँ

तनोट माता – लोक देवी

तनोट माता का मंदिर पाकिस्तान बॉर्डर के पास जैसलमेर में स्थित है। तनोट माता भाटी शासकों की कुलदेवी है, लेकिन वर्तमान समय में तनोट माता को आर्मी के जवानों की कुलदेवी कहां जाता है।

क्योंकि वर्ष 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय अनेक सारे बारूद इस मंदिर पर दागे गए थे। जिसमें से एक भी गोला बारूद नहीं फटा। भारत-पाकिस्तान युद्ध में तनोट माता की विशेष कृपा भारतीय सेना पर रही और इसी के चलते हैं भारत में पाकिस्तान पर विजय प्राप्त की।

आज भी तनोट माता मंदिर के आगे भारत का विजय प्रतीक विजय स्तंभ मौजूद है। आज के समय में भी तनोट माता की पूजा भारतीय सेना के जवान करते हैं।

शीतला माता – लोक देवी

शीतला माता की पूजा होली के आठवें दिन शीतला अष्टमी के अवसर पर की जाती है। शीतला देवी का प्रमुख स्थान जयपुर के चाकसू नगर में स्थित है। शीतला माता को सुहाग देवी के नाम से जाना जाता है।

शीतला माता मंदिर का पुजारी कुम्हार होता है। शीतला माता मंदिर का निर्माण महाराजा महादेव सिंह प्रथम ने करवाया था। राजस्थान की लोक देवियाँ

नागणेचियाँ माता – लोक देवी

नागणेचिया माता राठौड़ राजवंश की कुलदेवी है। नागणेचिया माता को नागणेची, राजेश्वरी व चक्रेश्वरी माता के नाम से भी जाना जाता है।

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राजस्थान के जोधपुर जिले के नागाणा गांव में नागणेच्या माता का प्राचीन मंदिर स्थित है। इस मंदिर में माता नागणेचा की चांदी की मूर्ति राज वंश शासक राव बिका ने लगवाई थी।

शाकम्भरी माता – लोक देवी

शाकंभरी माता पार्वती देवी का अवतार हैं। हिंदू धर्म में सभी शाकाहारी वस्तुओं को शाकंभरी देवी का प्रसाद माना जाता है। शाकंभरी माता का मंदिर राजस्थान के सांभर में स्थित है।

राणी सती – लोक देवी

सती माता का मंदिर राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित है। रानी सती माता ने अपने पति की मृत्यु होने पर आत्मा दाह/ सती हो गई थी। रानी सती माता को संपूर्ण राजस्थानी श्रद्धा से पूजते हैं। यह झुंझुनू क्षेत्र की प्रमुख लोक देवी है।

नारायणी माता – लोक देवी

नारायणी माता का मंदिर 11वीं सदी में बनाया गया था। नारायणी माता को नाई जाति के लोग अपनी आराध्या देवी के रूप में मानते हैं। नारायणी माता के दो मंदिर है, एक राजस्थान में दूसरा महाराष्ट्र में स्थित है।

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आई माता – लोक देवी

राजस्थान में सीरवी जाति के लोगों की कुलदेवी आई माता है। आई माता का मंदिर जोधपुर जिले के बिलाड़ा गांव में स्थित है। यहां पर हर वर्ष आकर्षक मेला लगता है। वर्ष 1956 ईस्वी से इस मंदिर में एक गद्दी पर माता आईतस्वीरें रखी हुई है।

महामाया देवी जी- लोक देवी

गर्भवती महिलाएं स्वस्थ और प्रसन्न बच्चे के लिए महामाया देवी जी की पूजा करती है। महामाया देवी जी का मंदिर उदयपुर के मावली में स्थित है।

चौथ माता – लोक देवी

कंजर समाज की कुलदेवी चौथ माता है। चौथ माता का मंदिर सवाई माधोपुर जिले में स्थित है। सुहागिन स्त्रियां अपने सुहाग की रक्षा के लिए कार्तिक मास की कृष्ण चतुर्थी पर चौथ माता का व्रत करती है।

घेवर माता – लोक देवी

प्राचीन काल में घेवर माता ने अपने हाथों से अग्नि को प्रज्वलित करके उसी अग्नि में सती हो गई थी। घेवर माता का मंदिर राजसंम्बद की पाल पर स्थित है। राजसमंद में पुल बनते बनते टूट जाया करता था, जब ज्योतिष के कहने पर ऐसी पवित्र स्त्री ढूंढने को कहा जिसके बाएं गाल पर आंखों के नीचे तिल हो।

घेवर माता ने अपने हाथ से पाल का पत्थर रखा जिसके बाद उस पाल का पूरा निर्माण हो सका। घेवर माता राजस्थान की एकमात्र ऐसे लोग देवी है जो बिना पति के सती हुई थी।

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जिलाणी माता – लोक देवी

जिलानी माता ने हिंदुओं की रक्षा की थी। व हिंदुओं को मुसलमान बनाने से भी बचाया था। वर्तमान समय में जिलानी माता का मंदिर अलवर जिले के बहरोड़ कस्बे की एक प्राचीन बावड़ी के पास स्थित हैं। हर वर्ष जिलानी माता के मंदिर पर दो विशाल मेला का आयोजन होता है।

ब्रह्माणी माता – लोक देवी

ब्राह्मणी माता का मंदिर राजस्थान के बरन में स्थित है। यह एक प्राचीन मंदिर है, जो किले में बनी एक गुफा के नीचे स्थित हैं। यहा पिछले 400 वर्षों से अखंड ज्योति जग रही है। शिवरात्रि के दिनों में यहां पर बहुत बड़ा मेला लगता है।

भदाणा माता – लोक देवी

भदाना माता का मंदिर कोटा में स्थित है। भदाना माता कोटा के राजवंशों की कुलदेवी है। तांत्रिकों की चपेट में आने वाले व्यक्तियों को मृत्यु से बचाती थी भदाना माता।

छींक माता – लोक देवी

छींक माता राजस्थान की प्रमुख लोक देवियां में से एक है। छींक माता का मंदिर जयपुर में स्थित है। यहां पर माघ सुदी सप्तमी को पूजा की जाती है।

बडली माता – लोक देवी

बड़ली माता के नाम की ताती बांधने से बीमार व्यक्ति ठीक हो जाता है। बीमारी से ठीक होने पर बड़ली माता के मंदिर पर लोहे की त्रिशूल चढ़ाने की परंपरा है। बड़ली माता का मंदिर चित्तौड़गढ़ जिले में बेड़च नदी के किनारे पर स्थित है।

सच्चियाय माता – लोक देवी

सचिया माता का मंदिर जोधपुर की ओसिया तहसील में स्थित है, इसीलिए इन्हें ओसिया माताजी भी कहा जाता है। इस मंदिर का निर्माण 10 वीं शताब्दी में अपनी कुलदेवी के लिए परमार राजा उपेंद्र ने करवाया था।

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आशापुरा माता – लोक देवी

आशापुरा माता लोगों की इच्छाएं पूरा करने के लिए संपूर्ण राजस्थान में पूजी जाती है। आशापुरा माता को कच्छ की कुलदेवी कहां जाता है। आशापुरा माता का मंदिर गुजरात में स्थित हैं, इन्हें अन्नपूर्णा देवी भी कहा जाता है।

कालिका माता – लोक देवी

कालिका माता का मंदिर सिसोदिया राजवंश के शासक बप्पा रावल ने एक सूर्य मंदिर के रूप में बनवाया था। यह मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है। इस मंदिर में महाराणा हमीर सिंह ने चौधरी शताब्दी में कालिका माता की मूर्ति को स्थापित करवाया था।

आमजा माता – लोक देवी

आमजा माता को राजस्थान की वैष्णो देवी भी कहा जाता है। यह मंदिर पहाड़ों के बीच स्थित है। आमजा माता भीलों की कुलदेवी है। आज भी आमजा माता की पूजा एक ब्राह्मण पुजारी व दूसरा भील भोपा करता है।

चारणी देवी – लोक देवी

चारणी देवी का मंदिर जोधपुर जिले के फिटकासनी गांव के पास अरावली श्रंखला की पहाड़ियों में स्थित है। चारणी देवी को आईनाथ व जोगमाया के रूप में पूजते हैं।

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सांगिया माता – लोक देवी

सांगिया माता को भाटियों की कुलदेवी कहा जाता है। इनका मंदिर जैसलमेर में स्थित है। जैसलमेर के राज्य चिन्ह में सुगन चिड़ी का प्रतीक स्थित है। आवड़ माता भी कहते हैं।

ज़मुवाय माता – लोक देवी

जमवाय माता को कछवाहा राजवंश की कुलदेवी कहा जाता है जमवाय माता का मंदिर जयपुर में स्थित है। यह बैठकों का एक प्रमुख स्थल भी है। कथाओं का कहानियों में जमवाय माता का नाम जामवंती बताया जाता है।

त्रिपुरा सुन्दरी माता – लोक देवी

त्रिपुरा सुंदरी माता का मंदिर राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में स्थित है। यह मंदिर तलवाड़ा से लगभग 5 किलोमीटर की दूरी पर पहुंची हरी-भरी श्रृखलाओं में स्थित है।

लटियाल माता – लोक देवी

लटियाल माता का मंदिर जोधपुर के फलोदी तहसील में स्थित है। लटियाल माता का मंदिर वर्ष 1500 ईसवी पूर्व बनाया गया था।

हिंगलाज माता – लोक देवी

हिंगलाज माता चौहान वंश की कुलदेवी है। हिंगलाज माता को हिंगुला देवी भी कहते हैं।

ज्वाला मात – लोक देवी

खंगारोत राजपूत राजवंशों की कुलदेवी ज्वाला माता है। ज्वाला माता का मंदिर में बिना तेल और बाती के प्राकृतिक रूप से नौ ज्वालाएं प्रचलित है। ज्वाला माता का मंदिर जयपुर में स्थित है।

अवारी माता – लोक देवी

आवरी माता का मंदिर चित्तौड़गढ़ में स्थित है। यह मंदिर लगभग 750 वर्ष से भी अधिक पुराना है। पहाड़ी वादियों में बने हुए इस मंदिर का दृश्य मनमोहक लगता है।

कुशाल माता – लोक देवी

कुशल माता का मंदिर मेवाड़ के राणा कुंभा ने महमूद खिलजी को हराकर अपने इस विजय की याद में 1457 ईस्वी में बनवाया था। यहां पर भादवा मास की कृष्ण ग्यारस से अमावस्या तक मेला लगा रहता है।

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अर्बुदा देवी – लोक देवी

अर्बुदा देवी का मंदिर राजस्थान के माउंट आबू की पहाड़ियों पर स्थित है, इसीलिए अब देवी को राजस्थान की वैष्णो देवी भी कहा जाता है। देवी को अधिष्ठात्री देवी के रूप में पूजा की जाती है।

चामुंडा माता

चामुंडा माता को प्रतिहार/परिहार की शाखा इंदा वंश की कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। चामुंडा माता को चंडी माता भी कहते है।

बाण माता – लोक देवी

बाण माता को सिसोदिया व गहलोत सूर्यवंशी राजपूत राजवंश अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। बाण माता बायण माता व बाणेश्वरी माता के रूप में पूजी जाती है। श्री बाण माताजी का मंदिर चित्तौड़गढ़ दुर्ग में स्थित है। मंदिर महाराणा हमीर सिंह जी द्वारा बनवाया गया था।

खीमज माता – लोक देवी

सोलंकी राजवंश खीमज माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूजते हैं। यह मंदिर भीनमाल कस्बे में स्थित हैं। भीनमाल कस्बे की ऊंची पहाड़ियां पर स्थित यह एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण चामुंडा वंश के शासक में 682 ईसवी में करवाया था।

इंद्रगढ की बीजासण माता – लोक देवी

बिजासन माता का मंदिर बूंदी जिले में स्थित है। यह मंदिर अत्यंत विशाल पहाड़ियों पर स्थित है। इस मंदिर पर पहुंचने के लिए 800 सीढ़ियां बनाई गई है। यहा पर प्रतिवर्ष वैशाख मास की शुल्क पूर्णिमा व आश्विन और चैत्र मास में नवरात्रि को विशाल मेले का आयोजन होता है।

सुंधा माता – लोक देवी

सुंधा माता देवल राजवंश की कुलदेवी है। ब्राह्मणों के लाडवा गोत्र सुंधा माता को अपनी कुलदेवी के रूप में पूछते हैं। सुंधा माता का मंदिर लगभग 900 वर्ष पुराना 850 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ियों में बना हुआ है।

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वीरातरा माता – लोक देवी

विरात्रा माता का मंदिर बाड़मेर के चौहटन में स्थित है। विरात्रा माता वोटों की कुलदेवी मानी जाती है इसी स्थान पर वीरा विक्रमादित्य नवरात्रि में विश्राम किया था, इसीलिए इस स्थान का नाम विरात्रा पड़ गया।

धौलागढ़ माता – लोक देवी

धोलागढ़ माता का मंदिर अलवर जिले में स्थित है। यह ब्राह्मणों की कुलदेवी है। इस मंदिर पर चढ़ने के लिए 101 सीढ़ियां बनाई गई है। ढोल गिरी पर्वत पर स्थित इस मंदिर से धोलागढ़ देवी नाम पड़ा था।

राठासण देवी – लोक देवी

राठासण देवी के मंदिर का निर्माण राज वंश शासक बप्पा रावल द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर नागदा में एकलिंग जी के मंदिर के पास बनाया गया है। राजस्थान की लोक देवियाँ।

मनसा माता – लोक देवी

मन की मनोकामना पूरी करने के कारण इस देवी को मनसा माता के नाम से जाना जाता है। मनसा माता का मंदिर झुंझुनू जिले के खेतड़ी क्षेत्र में स्थित है। नवरात्र के दौरान यहां पर विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। यहां पर लाखों श्रद्धालु दूर-दूर से आते हैं।

नकटी माता – लोक देवी

गुर्जर व प्रतिहार शासकों की कुलदेवी नकटी माता का प्राचीन मंदिर उदयपुर के जय भवानी पुरा गांव में स्थित है। आठवीं नौवीं शताब्दी में इस मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ। यह माता गांव में चोर लुटेरों से ग्रामीणों को बचाती थी।

जोगणिया माता – लोक देवी

हाडा चौहान राजवंश की कुलदेवी जोगणिया माता है। जोगणिया माता का मंदिर चित्तौड़गढ़ के पठार क्षेत्र में स्थित है। यह एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर का निर्माण आठवीं शताब्दी में हुआ था।

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सुगाली माता – लोक देवी

आऊआ के चंपावत और ठाकुरों की कुलदेवी सुगाली माता है। सुगाली माता का यह मंदिर काले पत्थरों से बना हुआ है। सन 1857 के स्वाधीनता संग्राम में स्वतंत्रता सेनानियों को इस मंदिर से खास प्रेरणा मिली थी।

कैवाय माता – लोक देवी

केवाई माता का मंदिर नागौर के परबतसर की अरावली पर्वत माला पर स्थित है। यह एक प्राचीन मंदिर है। इस मंदिर को अंबिका माता के नाम से भी जाना जाता है।

दधिमती माता – लोक देवी

दधीमती माता ब्राह्मण समाज की कुलदेवी है। माता का मंदिर नागौर जिले के जायल तहसील में स्थित हैं। दधीच माता ब्राहमण समाज की कुल माता कुलदेवी हैं।

वटयक्षिणी देवी – लोक देवी

यह मंदिर चित्तौड़गढ़ में स्थित है इस मंदिर की मूर्ति महाभारत काल से ही स्थित है। यहां पर प्राचीन काल में एक विशाल वट का वृक्ष था। इसीलिए इन्हें वटयक्षिणी माता के नाम से भी जाना जाता है।

पिप्पलाद माता – लोक देवी

पिप्पलाद माता का मंदिर उदयपुर में अंधी घाटी के पास स्थित है।

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अंतिम शब्द

इस लेख में हमने आपको राजस्थान की लोक देवियाँ के बारे में विस्तार से बताया है। तो हम उम्मीद करते हैं कि यह आलेख आपको जरूर पसंद आया होगा। इस लेख को आप अपने मित्रों और परिवार जनों के साथ शेयर जरूर करें। राजस्थान की लोक देवियाँ

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